राज्यपाल के इस कड़े रुख के बाद अब राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है
कोलकाता। आनंदपुर के भयावह अग्निकांड ने अब राजभवन और नबान्न के बीच एक बार फिर तल्खी बढ़ा दी है। मलबे से निकलती लाशों और प्रशासन की कथित सुस्ती के बीच शुक्रवार को राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस स्वयं ग्राउंड जीरो पर पहुंचे। प्रभावित इलाके का निरीक्षण करने के बाद राज्यपाल ने बेहद कड़े तेवर अपनाते हुए राज्य सरकार और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने इस त्रासदी को महज एक दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे मानवीय लापरवाही का परिणाम करार दिया। घटनास्थल का बारीकी से जायजा लेने के बाद राज्यपाल ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि ऐसी हृदयविदारक घटनाओं को किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि कई कीमती जानें सिर्फ इसलिए चली गईं क्योंकि सुरक्षा मानकों और नियमों की अनदेखी की गई।
राज्यपाल के अनुसार, कानून लागू करने वाली एजेंसियां अपनी बुनियादी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रही हैं, जिसके कारण इतने बड़े पैमाने पर जनहानि हुई। राज्यपाल बोस ने पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक स्थिति पर चिंता जताते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल को सॉफ्ट स्टेट बनने नहीं दिया जा सकता, जहां नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यवस्था में मौजूद कमियों के कारण ही ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा साफ था कि सत्ता और प्रशासन को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी। उन्होंने सभी हितधारकों को अपनी आंख और कान खुले रखने की नसीहत दी। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राज्यपाल ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही राज्य सरकार के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी करेंगे, जिसमें सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कड़े निर्देश होंगे। राज्यपाल के इस कड़े रुख के बाद अब राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्यपाल की इस एडवाइजरी पर राज्य सरकार क्या रुख अपनाती है और आने वाले दिनों में सुरक्षा मानकों को लेकर क्या बदलाव किए जाते हैं।